जीपीएम में श्रवण एवं मूकबधिर दिव्यांग बच्चों के लिए आवासीय विद्यालय शुरू, प्रवेश प्रारंभ।।

कोटमी-सेखवा रोड पर श्रवण एवं मूकबधिर दिव्यांग बच्चों के लिए आवासीय विद्यालय शुरू, प्रवेश प्रारंभ।।


जिला प्रशासन के प्रयास से साकार हुई पहल, शिक्षा के साथ आवासीय सुविधा भी मिलेगी।।

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। जिले के श्रवण एवं मूकबधिर दिव्यांग बच्चों के लिए बड़ी सौगात सामने आई है। कोटमी-सेखवा रोड पर श्रवण एवं मूकबधिर दिव्यांग बच्चों के लिए आवासीय विद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। जिला प्रशासन के प्रयासों से यह सुविधा जिले में उपलब्ध हो सकी है, जिससे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा के साथ सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवासीय वातावरण मिल सकेगा।

आवासीय विद्यालय शुरू होने से जिले के ऐसे बच्चों और उनके अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अब तक उनकी विशेष जरूरतों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ता था। विद्यालय में बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप शैक्षणिक गतिविधियों के साथ आवश्यक मार्गदर्शन एवं कौशल विकास का अवसर भी मिलेगा।

जिला प्रशासन की पहल का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है। कोटमी-सेखवा रोड पर विद्यालय की शुरुआत जिले में दिव्यांग शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आवासीय सुविधा उपलब्ध होने से दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले बच्चों को भी पढ़ाई जारी रखने में सहूलियत होगी।

विद्यालय में बच्चों को शिक्षा के साथ उनके दैनिक जीवन से जुड़े आवश्यक कौशल विकसित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। उचित वातावरण और विशेष जरूरतों के अनुरूप शिक्षा मिलने से बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने का बेहतर अवसर मिलेगा।

प्रवेश के इच्छुक अभिभावक कोटमी-सेखवा रोड स्थित आवासीय विद्यालय अथवा संबंधित विभाग से संपर्क कर प्रवेश प्रक्रिया, पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और अन्य जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। जिला प्रशासन की ओर से अभिभावकों से अपील की गई है कि पात्र श्रवण एवं मूकबधिर दिव्यांग बच्चों को इस सुविधा का लाभ दिलाएं और उनका प्रवेश कराएं।

जिले में इस विद्यालय का संचालन समावेशी एवं समान अवसर आधारित शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। जिला प्रशासन के प्रयासों से शुरू हुई यह सुविधा आने वाले समय में श्रवण एवं मूकबधिर दिव्यांग बच्चों के शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार साबित हो सकती है।

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