सार्वजनिक तालाब के मेढ़ को भी नही छोड़ रहे है अवैध उत्खनन करने वाले।।

मरवाही के खरिखांडा तालाब की मेड़ पर चली जेसीबी-पोकलेन, अवैध मुरुम उत्खनन के बाद ढेर और गड्ढे छोड़ गए निशान।।

मरवाही जनपद पंचायत का मामला।

मनरेगा नवीनीकरण के सूचना पटल के सामने ही तालाब की मेड़ क्षतिग्रस्त, ग्रामीणों ने पंचायत और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल।।


गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, जनपद पंचायत मरवाही अंतर्गत ग्राम पंचायत नरौर के ग्राम झिरनापोंड़ी में पुराने सामुदायिक खरिखांडा तालाब की मेड़ पर बड़े पैमाने पर खुदाई किए जाने का मामला सामने आया है। तालाब की मेड़ धीरे-धीरे खोदे जाने से उसके अस्तित्व और सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई दिनों तक जेसीबी और पोकलेन जैसी भारी मशीनों से खुदाई की गई तथा मेड़ से निकाली गई मुरुम को बाहर ले जाया गया।


मौके पर अब भी मुरुम के बड़े-बड़े ढेर, गहरे गड्ढे और भारी मशीनों के टायरों के निशान दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह किसी छोटे-मोटे कार्य का हिस्सा नहीं, बल्कि लंबे समय तक मशीनों के माध्यम से की गई खुदाई प्रतीत होती है। ग्रामीणों ने मामले की जांच कर यह पता लगाने की मांग की है कि तालाब की मेड़ की खुदाई किसके निर्देश पर और किस उद्देश्य से कराई गई।


मामले को लेकर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि तालाब के पास मनरेगा नवीनीकरण कार्य का सूचना पटल लगा हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक सरकारी योजना के तहत तालाब के नवीनीकरण की जानकारी प्रदर्शित की गई है, लेकिन उसी के सामने तालाब की मेड़ को खोदकर क्षतिग्रस्त किए जाने के निशान मौजूद हैं। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि मौके पर वास्तव में कौन-सा कार्य कराया गया और उसकी अनुमति किस स्तर से दी गई।


ग्रामीणों का कहना है कि दिन के समय मशीनों से खुदाई और मुरुम की ढुलाई होती रही, इसके बावजूद पंचायत स्तर से लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों तक समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि तालाब गांव की सामुदायिक संपत्ति और महत्वपूर्ण जलस्रोत है। मेड़ कमजोर होने से बारिश के दौरान पानी के दबाव में तालाब को नुकसान पहुंचने की आशंका है।।।


ग्रामीणों ने मौके के फोटो और वीडियो भी सामने रखे हैं। उन्होंने संबंधित विभाग से स्थल निरीक्षण कर खुदाई की अनुमति, कार्यादेश, तकनीकी स्वीकृति और मुरुम की निकासी से जुड़े अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्य सरकारी योजना के तहत हुआ है तो उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए और यदि बिना अनुमति खुदाई की गई है तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।।।


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